सनातन संस्कृति के अनुसार नयी भूमि का पूजन होना चाहिए। पर भूमि पूजन क्या है ? भूमि पूजन की विधि (Bhumi Pujan Vidhi) क्या है ? शिलान्यास कैसे किया जाता है ? नीव पूजन का महत्व क्या है ? भूमि पूजन के लिए क्या सामग्री चाहिए ? ऐसे सभी सवालों का जवाब आपको यहाँ मिलेगा।
भूमि पूजन क्या है ? शिलान्यास क्या है ?
सनातन हिन्दू धर्म में ज्ञान और विज्ञानं का अद्भुत समन्वय है। प्रकृति का का जितना महत्व हिन्दू धर्म में है, शायद ही किसी धर्म में पाया जायेगा। हिन्दू भारतीय संस्कृति प्रकृति प्रेमी है।
इस संस्कृरि में नदियों को माता का दर्जा दिया गया है। गाय को माता मानके पूजन किया जाता है। छोड़ में रणछोड़ के दर्शन किया जाता है। पर्वत, पेड़, नदी, सागर सब इस प्रकृति का हिस्सा है। भगवान की इस खूबसूरत दुनिया बनाने में योगदान है।
धरती माता इस जिव और निर्जीव, सृष्टि के सभी रचना को अपने आंचल में समाये सख्ती है। चल अचल सबका भार वहन करती है। जबसे सृष्टि का निर्माण हुआ तबसे धरती माता के अनंत उपकार इस सृष्टि पर है।
धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए। माता धरती का पूजन होना चाहिए। हिन्दू धर्म ग्रंथो में भूमि पूजन का विशेष महत्व दिया गया है।
भूमि पूजन क्यों किया जाता है ?
सनातन हिन्दू धर्म में मानने वाले सभी लोग जब कोई नयी जगह पे निर्माण कार्य प्रारम्भ करते है, इससे पूर्वे उस जगह भूमि पूजन की विधि (Bhumi Pujan Vidhi) जरूर करते है।
इस निर्माण कार्य हमारे घर, दुकान, सड़क या किसी भी प्रकार का हो सकता है। इसे शरू करने से पहले भूमि पूजन ( शिलान्यास ) जरूर करते है।
जो जमीन हमने खरीदी है, यह हमारे लिए नयी है। नयी जमीन को दोषमुक्त करने के लिए, पवित्र करने के लिए, किसी भी प्रकार का निर्माण करने से पहले उस भूमि का पूजन किया जाता है।
भूमि पूजन को शिलान्यास या नीव पूजन भी कहते है।
भूमि पूजन करने के विशेष कारण
1 – जिस जमीन पे हम निर्माण करने वाले है, उस जमीन का इतिहास हमें मालूम नहीं होता। इस जमीन पे कोई भी दोष हुआ हो तो उसे भूमि पूजन विधि (Bhumi Pujan Vidhi) से दूर किया जाता है।
2 – भूमि पर जाने अनजाने में जिव सृष्टि से कोई भी अपवित्र काम हुआ हो तो, उस भूमि का पूंजन करके उसे पवित्र किया जाता है।
3 – जिस धरती पे हम निर्माण करने जा रहे है, उस धरती पर कही तरह के छोटे-मोटे जिव का वास हो सकता है। हमारे निर्माण के कारण उन्हें अपनी जगह छोड़नी पड़ती है। भूमि पूजन से हमें उस पाप से मुक्ति मिलती है।
4 – भूमि पूंजन से नकारात्मक ऊर्जा का नाश है। और हमारा जो भी निर्माण है, वह निर्विग्न पूर्ण होता है।
5 – जहा हम निर्माण कर रहे है, वहां धरती पर हमारा भार हमेशा रहने वाला है। इसीलिए कृतज्ञता पूर्वक वंदन करने हेतु भूमि पूजन किया जाता है।
6 – निर्माण के दौरान अनेक प्रकार के औज़ार का इस्तेमाल किया जाता। इसमें किसी जिव को हानि न पहुंचे और सफलता से हमारा कार्य सम्पन्न हो इसीलिए भूमि पूजन की विधि (Bhumi Pujan Vidhi) करना चाहिए।
7 – हिन्दू शास्त्रों के अनुशार धरती शेष नाग पे है। हम भूमि पूजन के जरिये नाग का भी पूजन करते है। जो जीवन में हर प्रकार के विष से हमारी रक्षा करते है।
भूमि पूजन से क्या लाभ होता है ?
1 – भूमि पूजन से भूमि ( जमीन ) पवित्र हो जाती है।
2 – भूमि से हर प्रकार के दोष दूर हो जाते है।
3 – हमारे निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न नहीं होती।
4 – उस भूमि में हुए हरेक पाप से हमें मुक्ति मिलती है।
5 – पवित्र भूमि में निवास हमारी प्रगति के लिए आवश्यक है।
6 – भूमि दोष दूर होने से हम सुख और शांति से जीवन व्यतीत कर सकते है।
7 – भूमि पूजन से सकारात्मक एनर्जी का संचार होता है।
भूमि पूंजन का विधि विधान – कैसे करे भूमि पूंजन- Bhumi Pujan Vidhi
भूमि पूजन को शिलन्यास या नींव पूंजन भी कहते है। भूमि पूजन एक खास प्रकार की पूजा पद्धति है।
भ्राह्मण से भूमि पूंजन के लिए मुहर्त दिखाना चाहिए। ब्राह्मण के बताये शुभ मुहर्त में ही भूमि पूजन (Bhumi Pujan vidhi) का आयोजन करे।
- भूमि पूंजन करने से पहले हमें उस जमीन को साफ कर देनी चाहिए।
- भूमि पूजन के लिए किसी विद्वान ब्राह्मण को बुलाना चाहिए।
- नीव पूजन के लिए ब्राह्मण और जातक के आसान बिछाने चाहिए।
- पूंजन के वक्त ब्राह्मण को उत्तर मुखी और जातक को पूर्वे की तरफ मुख रखना चाहिए।
- विवाहित जोड़े को साथ में पूजा में बैठना होता है। इसमें बायीं तरफ पत्नी को बिठाना चाहिए।
- ब्राह्मण द्वारा श्लोक एवं मंत्रोचार किया जाता है।
- सबसे पहले विग्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा की जाती है।
- शिलान्यास में चांदी के नाग या सर्प के जोड़े एवं कलश की पूंजा की जाती है।
- पानी से भरा कलश में दूध, दही, घी डालकर शेष नाग का आह्वान किया जाता है।
- वरुण पूंजा, नवग्रह पूंजा देवता और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।
- शिला ( इंट ) सुचारु रूप से रखके पूंजन किया जाता है।
Shree Ram Mandir Bhumi Pujan vidhi
भूमि पूजन की साधन सामग्री- Bhumi Pujan Vidhi Samagry
भूमि पूजन के लिए पूजा सामग्री की जरुरत पड़ती है। आमतौर पर ये सामग्री हमें ब्राह्मण के पास ही मिल जाती है। ब्राह्मण ये सामग्री लेकर ही पुंजा के लिए उपस्थित होते है। अन्यथा वे हमें सामग्री का लिस्ट बना देते है। भूमि पूजन की सामग्री का लिस्ट निचे दिया गया है।
1 – ताम्बा का लोटा ( कलश )
2 – मौली
3 – सर्प का जोड़ा
4 – चावल
5 – श्री फल
6 – लाल कपडा
7 – गंगा जल
8 – कपूर
9 – देशी घी
10 – दूर्वा घास
11 – सुपारी
12 – लोंग, इलाइची
13 – फल
14 – हल्दी पॉवडर
15 – अबिल, गुलाल, कुमकुम
16 – फूल हार
17 – भागवद गीता ( धार्मिक पुस्तक )
18 – इंट
19 – मिठाई
20 – निर्मल जल
21 – आम के पत्ते
घर के लिए भूमि ( प्लाट ) खरीदते वक्त क्या ध्यान रखे ? शिलान्यास कैसी भूमि पे करे ?
हरएक मनुष्य का अपना घर हो यह सपना होता है। लोग एक घर बनाने के लिए अपने पुरे जीवन की कमाई खर्चा कर देते है। मनुष्य को दुनिया में सबसे ज्यादा शांति प्रदान करने वाला स्थळ माना जाता है। दुनिया के किसी भी कोने से थक – हार के आने वाले मनुष्य को अपने घरमे ही सुकून और शांति प्राप्त होती है।
इसीलिए घर या घरके लिए प्लाट खरीदने से पहले हमें कुछ खास बातो का ध्यान रखना चाहिए। जिसे हमें जीवन दुःख अशांति और कलेह का सामना न करना पड़े।
1 – घर के लिए जो प्लाट खरीदते है, वह चोरस है तो उत्तम माना जाता है।
2 – यदि चोरस नहीं है तो लंबचोरस याने जिस प्लाट की दो बाजुए सैम होनी चाहिए। लंबचोरस में बहुत ही लम्बा प्लाट जैसे की (80 *10) नहीं होना चाहिए।
3 – मकान बनाने के लिए प्लाट ले रहे है, उस प्लाट में कोई भी विषैला या हिंसक प्राणी का वाश नहीं होना चाहिए।
4 – प्लाट खड़े में नहीं होना चाहिए। इतिहास देखे वहां कोई कुआँ तो नहीं था।
5 – प्लाट के अंदर कूड़ा कचरा और हड्डी दबी नहीं होनी चाहिए।
6 – जमीन से किसी तरह की दुर्गन्ध नहीं आनी चाहिए।
7 – हमारे प्लाट के आसपास कोई कारखाना, कोई Merrige होल नहीं होना चाहिए। इससे हमारे निवास स्थान पर आवाज का प्रदुषण बढ़ता है। हमारे जीवन में बेचैनी रहती है।
8 – भूमि पूंजन के लिए प्लाट एक उपजाव जमीन होनी चाहिए।
9 – गौमुखी प्लॉट घर के लिए अच्छा माना जाता है। गौमुखी का मतलब गाय के मुख की तरह आगे से पतला और पीछे से चौड़ा होता है।
10 – सिंह मुखी या वाघ मुखी प्लाट घर के लिए ठीक नहीं माना जाता है। पर यह प्लाट दुकान या किसी तरह का धंधा करने के लिए निर्माण किया जाता है तो यह अच्छा है। सिंह मुखी माँ मतलब आगे से चौड़ा और पीछे से पतला होता है।
11 – प्लॉट खरीदने से पहले उस जमीन का माप और कागजात जरूर चेक करे।
माता धरती को वंदन करने का मंत्र – श्लोक
समुद्र वसने देवी पर्वत स्तन मांडले ।
विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यं, पादः स्पर्श समस्व में । ।
माता धरती को वंदन करने के लिए ये श्लोक का उच्चारण किया जाता है। सुबह में उठते समय हम धरती पर अपना पाव रखते है। हमारा वजन पूरा दिन धरती माता सहन करती है। इसीलिए माता धरती से कृतज्ञता पूर्वक क्षमा याचना करते है।
समुद्र रूपी वस्त्र धारण करने वाली, पर्वत रूपी स्तनों से सजित भगवान विष्णु की पत्नी माता धरती, मेरा पैर आप पे रख रहा हु इसीलिए, मुझे क्षमा करे।
भूमि पूजन से जुड़े कुछ सवाल और जवाब
भूमि पूजन विधि क्या है ?
भूमि पूजन की विधि हम ब्राह्मण के पास करवाते है। इस विधि में धरती माता का पूजन करते है। साथ में श्री गणेश, नाग देवता, विष्णु भगवान और सभी देवता का आह्वान करते है।
भूमि पूजन कब करते है ? भूमि पूजन का मुहर्त कब होता है ?
जब हम भूमि ( जमीन) पर घर, मकान, दुकान, सड़क जैसी कोई भी चीज का निर्माण करना चाहते है तो, यह निर्माण कार्य शरू करने से पहले हमें भूमि का पूजन करना पड़ता है।
भूमि पूजन कोण कर सकता है ?
भूमि पूजन ब्राह्मण के द्वारा करवाया जाता है। और पूजा में विवाहित जोड़ा होता है। पति पत्नी के साथ यह पूजा उत्तम मणि जाती है।
भूमि पूजन कब नहीं करना चाहिए ?
रविवार और मंगलवार के दिन भूमि पूजन और गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए।
जन्मदिन पे क्या करे ? क्या ना करे?
भूमि पूजन की ये विधि (Bhumi Pujan vidhi) नयी जमीन के निर्माण के समय आवश्यक है। हम और हमारे आनेवाली पेढिया सुख शांति और समृद्धिसे जीवन व्यतीत कर सकती है। शिलान्यास से सम्बंधित कोई सवाल है तो आप कमेंट बॉक्स में लिख सकते हो।