Durga Mata ki Aarti – माँ दुर्गा आरती

माता दुर्गा हिन्दू धर्म में मानने वाले की आस्था है। शक्ति की देवी माता दुर्गा को जगत जननी, जगदम्बा, माता पार्वती अदि नामों से भक्तो द्वारा पुकारा जाता है। माता दुर्गा के भक्त हररोज माता की आराधना करते है। पूजन करते है, आरती और मंत्र का जाप करते है। यहाँ Durga Mata ki Aarti की रचना हिंदी में लिखी गयी है। आशा है ये भक्तो को जरूर काम आएगी।

दुर्गा माता की पूजा,आराधना और आरती 

माता दुर्गा की आराधना का महत्व नवरात्रि में बढ़ जाता है। कहा जाता है की माता दुर्गा ने महिसासुर नामके राक्षश के साथ युद्ध किया था। यह युद्ध 9 दिन तक चला था। दसमे दिन माता दुर्गा ने महिसासुर राक्षस का वध किया था।

इसीलिए लोग शक्ति की उपासना करते है। और माता दुर्गा की आराधना करते है। नवराति के नो दिनों में इसका महत्व बढ़ जाता है। जैसे सावन महीना भगवान भोलेनाथ का कहा जाता है। ठीक उसी तरह नवरात्रि के नो दिन माता दुर्गा की आराधना का होता है।

नो दिन तक भक्त गण उपवास रखते है। सुबह साम माता की पूजा अर्चना करते है। और माता दुर्गा की आरती करते है।

 

दुर्गा माता की आरती – Durga Mata Ki Aarti Hindi

 

Durga Mata ki Aarti

 

माँ दुर्गा आरती 

अंबे तू है जगदंबे काली,जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गाये भारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।।

तेरे भक्त जनो पर, भीड़ पड़ी है भारी माँ।
दानव दल पर टूट पड़ो, माँ करके सिंह सवारी।
सो-सो सिंहो से बलसाली,अष्ट भुजाओ वाली,
दुष्टो को पल में संहारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।

अंबे तू है जगदंबे काली,जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गाये भारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।।

माँ बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत कपूत सुने है पर न, माता सुनी कुमाता।
सब पे करुणा दर्शाने वाली,अमृत बरसाने वाली,
दुखियो के दुखड़े निवारती,ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।।

अंबे तू है जगदंबे काली,जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गाये भारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।।

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगे माँ तेरे मन में एक छोटा सा कोना।
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियो के सत को सवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।।

अंबे तू है जगदंबे काली,जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गाये भारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।।

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली।
वरद हस्त सर पर रखदो,माँ संकट हरने वाली।
माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओ वाली,
भक्तो के काज तू सवारती,ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।।

अंबे तू है जगदंबे काली,जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गाये भारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।।

 

माता दुर्गा की आरती का महत्व 

नवरात्रि में माता दुर्गा की पूजा अर्चना के साथ आरती जरूर होती है। बिना आरती के पूजा अधूरी मानी जाती है। भक्त माता दुर्गा को अनेक नाम से पुकारते है। कोई महाकाली कहता है, कोई आदिशक्ति कहता है। कोई चंडिका कहता है, तो कोई जगत की कल्याण करनेवाली कहता है। कोई भवानी कहता है, तो कोई विंध्यवासिनी कहता है। महिसासुर वध करने वाली, सबकी जोली भरने वाली।    

आरती का धार्मिक महत्व तो है, साथ में वैज्ञानिक महत्व भी है। वैसे आरती अपने आराध्य देव, देवी के समिट जाने का रास्ता है। पर वैज्ञानिक दृष्टि से देखे तो आरती के दौरान जलाया जाने वाला कपूर वातावरण को शुद्ध करता है।

माता दुर्गा की आरती (Durga Mata ki Aarti) में बजने वाले शंख और घंटे की रणकार से वातावरण भक्तिमय बन जाता है। आरती के साथ माता के आशीर्वाद भक्तो को धन्यता प्रदान करता है।

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