पद्मिनी एकादशी 2026तिथि, व्रत विधि, कथा और अधिक मास का विशेष महत्व

32 महीनों में एक बार आती है यह एकादशी। साल में 24 एकादशियाँ आती हैं, लेकिन पद्मिनी एकादशी की बात ही कुछ और है। यह वह एकादशी है जो सिर्फ अधिक मास (मलमास) में आती है — और अधिक मास खुद ही लगभग 32-33 महीने में एक बार आता है। यानी जब भी आप पद्मिनी एकादशी का व्रत करते हैं, आप एक ऐसे दिव्य अवसर का लाभ उठा रहे होते हैं जो ढाई साल में मात्र एक बार मिलता है।

2026 में यह दुर्लभ अवसर फिर आया है। अधिक आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष एकादशी — यानी पद्मिनी एकादशी — 27 मई 2026 को पड़ रही है। पुराणों में इसे इतना फलदायी माना गया है कि अन्य Ekadashiyon का पुण्य जहाँ सीमित होता है, वहीं पद्मिनी एकादशी का पुण्य मोक्ष तक की राह खोल देता है। अगर आप भी इस व्रत की सम्पूर्ण जानकारी चाहते हैं — तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा, पारण समय — तो यह लेख आपके लिए ही है।

पद्मिनी एकादशी 2026 की तिथि 27 मई 2026, बुधवार है। यह अधिक मास (Purushottam Maas) की एकादशी है, जो लगभग 32-33 महीनों में एक बार आती है। भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत का पुण्य सामान्य एकादशी से कई गुना अधिक माना जाता है। पारण 28 मई को प्रातः 5:25 – 8:08 AM के बीच करें।

🗓 पद्मिनी एकादशी 2026 — Date, Tithi & Shubh Muhurat

विवरणसमय / तिथि
एकादशी तिथि प्रारंभ26 मई 2026, रात 10:24 बजे
व्रत का दिनबुधवार, 27 मई 2026
प्रातःकाल पूजा मुहूर्तसुबह 5:25 AM – 8:51 AM
शुभ मुहूर्त (अभिजित)10:35 AM – 12:19 PM
एकादशी तिथि समाप्त28 मई 2026, रात 12:44 बजे
पारण समय (Parana)28 मई 2026, 5:25 AM – 8:08 AM
माह / पक्षअधिक आषाढ़, शुक्ल पक्ष
वारबुधवार (Wednesday)

📌 Udaya Tithi Rule क्या है? एक source में एकादशी का प्रारंभ 26 मई को 5:10 AM से दिखाया गया है, तो दूसरे में 10:24 PM से। हिन्दू पंचांग में Udaya Tithi (सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो) मान्य होती है। चूँकि 27 मई को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि चल रही होगी, इसलिए व्रत का दिन 27 मई ही माना जाएगा।

🌙 अधिक मास — Yeh Kya Hota Hai? (Unique Deep Dive)

अधिक मास को समझना है तो पहले सौर (Solar) और चंद्र (Lunar) कैलेंडर का फर्क समझना होगा। हमारा सौर वर्ष लगभग 365.25 दिन का होता है, जबकि 12 चंद्र महीने मिलकर बनाते हैं लगभग 354 दिन — यानी हर साल करीब 11 दिन का अंतर आता है। जब यह अंतर एक पूरे महीने जितना हो जाए (लगभग 32-33 महीनों में), तब एक अतिरिक्त (Adhik) महीना जोड़ा जाता है — यही अधिक मास है।

कब आता है?
प्रत्येक 32-33 महीनों में एक बार — 2026 में अधिक आषाढ़ मास।

पुरुषोत्तम मास क्यों?
यह मास भगवान विष्णु को समर्पित है — वे स्वयं इसके अधिपति हैं।

100 गुना पुण्य
इस मास में दान-व्रत का फल सामान्य मास से 100 गुना अधिक माना जाता है।

2026 में कब तक?
2026 में अधिक मास मई-जून के दौरान, आषाढ़ मास में अतिरिक्त आएगा।

पुरुषोत्तम मास और विष्णु का संबंध

पुराणों के अनुसार, जब इस अतिरिक्त महीने का कोई स्वामी नहीं था, तब सभी देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने इसे अपना मास घोषित किया और कहा — “जो इस मास में मेरा व्रत-पूजन करेगा, उसे मैं अपनी शरण में लूँगा।” इसीलिए इसे Purushottam Maas (पुरुषोत्तम = सर्वश्रेष्ठ पुरुष = विष्णु) भी कहते हैं। Malmaas (मलमास) का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इसे पहले अशुभ माना जाता था, लेकिन विष्णु की कृपा से यह पवित्रतम हो गया।

इस मास में किए गए व्रत, दान, और तीर्थयात्रा का फल 100 गुना बढ़ जाता है — यही इस माह की असली विशेषता है। और जब इसी मास में एकादशी आए, तो कल्पना कीजिए उस पुण्य की शक्ति कितनी प्रबल होगी!

🪷 पद्मिनी एकादशी का महत्व — Spiritual + Mythological

“पद्म” यानी कमल — नाम में ही छिपा है रहस्य

पद्मिनी शब्द संस्कृत के “पद्म” से आया है, जिसका अर्थ है कमल का फूल। कमल को क्यों चुना गया इस एकादशी के नाम के लिए? क्योंकि कमल कीचड़ में उगता है, लेकिन उससे अलिप्त रहता है — पवित्र, सुंदर, और ऊर्ध्वमुखी। यही संदेश है पद्मिनी एकादशी का — संसार के कष्टों और पापों के बीच रहकर भी आत्मा विशुद्ध रह सकती है। भगवान विष्णु स्वयं पद्मनाभ हैं — जिनकी नाभि से कमल प्रकट होता है। लक्ष्मी जी का निवास भी कमल पर ही है।

पुराणों के अनुसार इस एकादशी का पुण्य:

  • मोक्ष प्राप्ति: अनगिनत जन्मों के पापों से मुक्ति और वैकुण्ठ की प्राप्ति।
  • संतान सुख: जिन दम्पतियों को संतान सुख नहीं, उन्हें इस व्रत से पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
  • अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल: ब्रह्मांड पुराण में उल्लेख है कि इस व्रत का फल सौ अश्वमेध यज्ञ से भी अधिक है।
  • पाप-मुक्ति: ज्ञात-अज्ञात पापों से मुक्ति मिलती है — सात जन्मों के पाप भी नष्ट होते हैं।
  • Adhik Maas Multiplier: अधिक मास में होने के कारण इस एकादशी का फल 100 गुना बढ़ जाता है।

भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को इस एकादशी का महत्व बताते हुए कहा था — “हे राजन्! पद्मिनी एकादशी का व्रत करने वाला मनुष्य चाहे कितना भी पापी हो, वह मेरी शरण में आ जाता है।” (भविष्योत्तर पुराण)

📖 व्रत कथा — Raja aur Rani ki Kahani

बहुत पुराने समय की बात है। एक धर्मपरायण राजा थे — जिनका नाम था चंद्रसेन। उनकी पत्नी रानी पद्मावती अत्यंत सुशील और भगवान विष्णु की परम भक्त थीं। राज-पाट, धन-धान्य — सब कुछ था, लेकिन एक अभाव था जो उनके हृदय को सदा कचोटता था: संतान का

वर्षों की पूजा-अर्चना के बाद, एक दिन वे दोनों तीर्थयात्रा पर निकले। गहन वन में, एक आश्रम में उन्हें महर्षि कौंडिन्य के दर्शन हुए। राजा-रानी ने उनके चरणों में प्रणाम किया और अपनी व्यथा सुनाई।

महर्षि ने कुछ पल ध्यान में रहने के बाद कहा — “हे रानी! अधिक मास की एकादशी — पद्मिनी एकादशी — का व्रत करो। पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान पद्मनाभ की पूजा करो। उनकी कृपा से तुम्हारी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी।”

रानी पद्मावती ने पूरी श्रद्धा से व्रत किया। दशमी की रात सात्विक भोजन किया। एकादशी को प्रातःकाल स्नान करके पीले वस्त्र धारण किए। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की षोडशोपचार पूजा की। तुलसी अर्पण किया, पंचामृत से अभिषेक किया, और रात भर जागकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया।

द्वादशी को विधिवत पारण किया। उसी वर्ष अधिक मास की इस एकादशी के पुण्य से रानी पद्मावती के घर में एक दिव्य पुत्र का जन्म हुआ — जो आगे चलकर महाबली और धर्मात्मा राजा बना।

कथा का सार: यह कथा सिखाती है कि श्रद्धा और धैर्य के साथ किया गया व्रत कभी निष्फल नहीं होता। पद्मिनी एकादशी केवल एक उपवास नहीं — यह आत्मा की शुद्धि की यात्रा है।

🙏 पूजा विधि — Step-by-Step Complete Guide

📅 दशमी (26 मई) — तैयारी का दिन

  • शाम से सात्विक और एकाहारी भोजन करें — चावल और अनाज से परहेज।
  • मन में भगवान विष्णु का स्मरण करें और संकल्प लें।
  • घर की साफ-सफाई करें, पूजा स्थान तैयार करें।

🌅 एकादशी (27 मई) — व्रत का दिन

  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान (4:30-5:25 AM) — गंगाजल या सामान्य जल में तुलसी पत्ता डालकर स्नान करें।
  • वस्त्र: पीले या श्वेत वस्त्र पहनें — दोनों विष्णु प्रिय हैं।
  • पूजा स्थान तैयार करें: चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं, गंगाजल छिड़कें।
  • प्रतिमा: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें — साथ में शालिग्राम रखें।
  • पंचामृत अभिषेक: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें — यह अत्यंत पुण्यकारी है।
  • तुलसी अर्पण: भगवान विष्णु को तुलसी के बिना भोग अधूरा है — प्रत्येक पूजा सामग्री के साथ तुलसी जरूर चढ़ाएं।
  • भोग: पंचामृत, पंचफल, मथुरा के पेड़े, तुलसी दल चढ़ाएं।
  • पाठ: पद्मिनी एकादशी व्रत कथा पढ़ें, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • दीपदान: घी का दीपक जलाएं, आरती करें।
  • रात्रि जागरण: रात को “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करें या विष्णु भजन सुनें।

✅ व्रत के नियम — Do’s & Don’ts

✅ क्या करें (Do’s)

  • फलाहार करें — फल, दूध, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा
  • सेंधा नमक का उपयोग करें
  • विष्णु नाम जप करें
  • दान-पुण्य करें — अन्न, वस्त्र, दीपदान
  • गाय को चारा दें
  • ब्राह्मणों को भोजन कराएं
  • तुलसी पूजन करें
  • मन को शांत और सात्विक रखें

❌ क्या न करें (Don’ts)

  • चावल और गेहूँ न खाएं
  • लहसुन, प्याज, तंबाकू से परहेज
  • झूठ न बोलें, क्रोध न करें
  • किसी को बुरा न कहें
  • बाल न कटवाएं, नाखून न काटें
  • तेल मालिश न करें (कुछ परंपराओं में)
  • Dwadashi को पारण से पहले भोजन न करें
  • नकारात्मक सोच और विकारों से दूर रहें

व्रत के चार प्रकार

व्रत प्रकारविवरण
जलाहारकेवल जल ग्रहण करें — अत्यंत कठिन, अत्यंत फलदायी
क्षीरभोजीकेवल दूध पीएं
फलाहारीफल, साबूदाना, सेंधा नमक — अधिकांश भक्त यही करते हैं
निर्जलाजल भी नहीं — सबसे महान, सबसे कठिन — स्वास्थ्य अनुसार करें

🌺 Adhik Maas में क्या करें — Special Practices

पद्मिनी एकादशी तो इस मास का शिखर है, लेकिन पूरा अधिक मास ही एक साधना का महीना है। जानिए इस पूरे महीने में क्या विशेष करना चाहिए:

  • विष्णु पाठ और कथा: श्रीमद्भागवत, विष्णु पुराण या पुरुषोत्तम मास की कथा का नियमित पाठ — प्रतिदिन या सप्ताह में एक बार।
  • तुलसी विवाह का महत्व: इस मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व है। तुलसी माता को विष्णु की पत्नी माना जाता है — इनकी नित्य पूजा और दीपदान करें।
  • दान का विशेष महत्व: अनाज, वस्त्र, दीपदान, गाय-दान — इस मास में किया गया दान 100 गुना फल देता है। जरूरतमंदों को अन्न दें।
  • पीपल वृक्ष की पूजा: पीपल को विष्णु का निवास माना जाता है। शनिवार को नहीं, लेकिन इस मास में पीपल की परिक्रमा और जल अर्पण अत्यंत शुभ है।
  • पितृ तर्पण: इस मास में पितरों के लिए तर्पण करने से पितृ दोष शांत होता है और पूर्वजों को शांति मिलती है।
  • ब्रह्मचर्य का पालन: इस पूरे मास को साधना-काल मानें — इंद्रिय संयम, सात्विक जीवनशैली।

🔬 Scientific + Wellness Angle — Ekadashi Vrat ke Health Benefits

आस्था के साथ-साथ, आधुनिक विज्ञान भी एकादशी उपवास के लाभों की पुष्टि करता है। महीने में दो बार उपवास — Shukla Paksha और Krishna Paksha की एकादशी — एक प्राकृतिक health rhythm बनाते हैं।

🫁 Gut Rest & Reset
एकादशी पर भारी अनाज न खाने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है। Gut bacteria को balance होने का समय मिलता है।

⏱ Intermittent Fasting
Ekadashi vrat का pattern 16:8 या 24-hour intermittent fasting जैसा ही है — जो metabolism को reset करता है।

🧠 Mental Clarity
उपवास के दौरान Ketosis शुरू होती है — brain अधिक efficiently काम करता है। रात्रि जप और ध्यान इसे और प्रभावशाली बनाते हैं।

💪 Autophagy
Extended fasting में शरीर Autophagy (खराब कोशिकाओं की सफाई) शुरू करता है — anti-aging प्रक्रिया है यह।

🥜 Sabudana & Phal Aahar
साबूदाना में starch और energy होती है। फलों में antioxidants, vitamins — शरीर को fasting में भी पोषण मिलता है।

😌 Stress Reduction
व्रत का मानसिक discipline cortisol (stress hormone) को कम करता है। विष्णु नाम जप parasympathetic nervous system को activate करता है।

महीने में दो एकादशी यानी दो बार उपवास — यह शरीर की natural detox rhythm के अनुसार है। चंद्रमा का शरीर के जल तत्व पर प्रभाव होता है, और शुक्ल पक्ष (बढ़ता चाँद) व कृष्ण पक्ष (घटता चाँद) की एकादशी पर उपवास इस rhythmic pattern को follow करता है।

🔔 Mantras — कौन से पढ़ें, कितनी बार?

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
अर्थ: “मैं भगवान वासुदेव (विष्णु) को नमन करता/करती हूँ।” यह द्वादशाक्षरी मंत्र — सबसे शक्तिशाली विष्णु मंत्र है। यह मंत्र भक्त की रक्षा करता है और मोक्ष का मार्ग खोलता है।
108 बार जपें — माला पर

ॐ नमो पुरुषोत्तमाय
अर्थ: “मैं पुरुषोत्तम (सर्वश्रेष्ठ पुरुष) भगवान विष्णु को नमस्कार करता/करती हूँ।” अधिक मास में यह मंत्र विशेष रूप से फलदायी है — क्योंकि यह मास पुरुषोत्तम भगवान का ही है।
108 बार — अधिक मास में विशेष प्रभावी

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः
अर्थ: “माँ महालक्ष्मी को श्री (समृद्धि), ह्रीं (शक्ति) और क्लीं (आकर्षण) के साथ नमस्कार है।” यह बीज मंत्र माता लक्ष्मी की कृपा के लिए है — धन, स्वास्थ्य और परिवार सुख देता है।
21 या 108 बार — लक्ष्मी पूजन में

🌅 पारण — व्रत सही तरीके से कैसे तोड़ें

पारण समय — 28 मई 2026 (बृहस्पतिवार)
🌄 प्रातः 5:25 AM – 8:08 AM
इस समय सीमा में ही व्रत तोड़ें — इससे पहले या बाद में नहीं

Hari Vasara क्या है और क्यों मना है?
द्वादशी (12वीं तिथि) के प्रारंभिक 1/4 भाग को Hari Vasara कहते हैं। इस समय में पारण करना वर्जित है — यह हरि (विष्णु) का विशेष समय होता है। 28 मई को द्वादशी रात 12:44 बजे समाप्त होती है, इसलिए पारण 5:25 AM से पहले न करें। साथ ही 8:08 AM तक पारण जरूर कर लें — उसके बाद द्वादशी का समय निकल जाता है।

पारण में क्या खाएं सबसे पहले?

  • पंच मेवा: काजू, बादाम, किशमिश, खजूर, अखरोट — सबसे पहले थोड़े मेवे लें।
  • पंचामृत: दूध, दही, घी, शहद, शक्कर का मिश्रण — पवित्र और पौष्टिक।
  • फल: केला, सेब, या मौसमी फल।
  • इसके बाद तुलसी जल पीएं और भगवान का धन्यवाद करें।

❓ FAQs — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. पद्मिनी एकादशी और सामान्य एकादशी में क्या फर्क है?

सामान्य एकादशी प्रत्येक पक्ष में आती है — साल में 24 बार। पद्मिनी एकादशी केवल अधिक मास (Purushottam Maas) में आती है, जो 32-33 महीनों में एक बार आता है। इसलिए यह एकादशी अत्यंत दुर्लभ है। इसके अलावा, अधिक मास में हर धार्मिक कार्य का फल 100 गुना बढ़ जाता है — इसलिए पद्मिनी एकादशी का पुण्य सामान्य एकादशी से अतुलनीय रूप से अधिक माना जाता है।

Q2. अधिक मास में एकादशी का पुण्य कितना ज़्यादा होता है?

शास्त्रों के अनुसार अधिक मास में किए गए व्रत, दान और पूजा का फल सामान्य मास की तुलना में 100 गुना अधिक होता है। जब इसी मास में पद्मिनी एकादशी आए, तो यह पुण्य और भी बढ़ जाता है। ब्रह्मांड पुराण में कहा गया है कि इस एकादशी के व्रत का फल 100 अश्वमेध यज्ञों के बराबर है।

Q3. क्या पद्मिनी एकादशी में पानी पी सकते हैं?

यह आपके व्रत के प्रकार पर निर्भर करता है। फलाहारी व्रत में पानी पी सकते हैं — इसमें कोई बाधा नहीं। क्षीरभोजी में दूध पीते हैं। जलाहार में केवल पानी पी सकते हैं। निर्जला व्रत में जल भी वर्जित है — लेकिन यह अत्यंत कठिन है और स्वास्थ्य की दृष्टि से सावधानी जरूरी है। बुजुर्ग, बीमार, गर्भवती और बच्चों को निर्जला व्रत नहीं करना चाहिए।

Q4. पद्मिनी एकादशी पर कौन सा रंग पहनें और क्या भोग चढ़ाएं?

रंग: पीला रंग सबसे शुभ है — यह विष्णु का प्रिय रंग है। श्वेत (सफेद) भी शुद्धता का प्रतीक है। केसरिया (saffron) भी उत्तम है। लाल रंग से बचें।

भोग: पंचामृत (दूध+दही+घी+शहद+शक्कर), पंचफल (पाँच फल), मथुरा के पेड़े, तुलसी दल, पीले फूल (गेंदा), और कमल का फूल अर्पण करना विशेष रूप से शुभ है — पद्मिनी एकादशी पर कमल का भोग अत्यंत प्रिय है भगवान को।