Ganesh ji ke 108 Naam – गणपति के 108 नाम

भगवान गणेश माता पार्वती अवं भगवान शिवजी की पुत्र है। हमारे देश में हम गणेश जी का त्यौहार धूम धाम से मनाते है। गणेश चतुर्थी हमारे त्योहारों का एक मुख़्य त्योहाय है। भगवान गणेश के अनेक नाम है । यहाँ गणेश भगवान के 108 नाम (Ganesh ji ke 108 Naam) दिया गया है। लम्बोदर विग्नहर्ता भगवान गणेश के भक्त गणेशजी को अनेक नाम पुकारते है। गणेश जी की आराधना करते है। 

भगवान श्री गणेश के 108 नाम – Ganesh 108 names Hindi

Ganesh ji ke 108 Naam

गणपति बाप्पा 

 

श्री गणपति 108 नामावली( Ganapati Namavali)

 

गणपति जी की 108 नाम की यह नामावली हिंदी अर्थ के साथ है। हरेक नाम के साथ उसका मीनिंग हिंदी में दिया गया है। वैसे भगवान गणेश के हजारो नाम है। जो जिस रूप में उनका पूजन करते के उस रूप में उसे मिलते है। गणपति के भक्त अलग – अलग नामसे उनका उच्चारण करते है। गणेश चतुर्थी के त्यौहार में भगवान गणेश की आराधना करते है। और अपनी मनोकामना पूर्ण करते है।

 

108 Name of Ganesh

1 – सुंधाला – हाथी जैसी सूंढ़ वाले

2 – बुद्धिनाथ – बुद्धि के दाता भगवान

3 – ध्रुमवार्ण- धुए को उड़ाने वाले

4 – भालचन्द्र – मस्तक पे चंद्र माँ वाले

5 – बालगणपति – बालक के रूप में गणपति

6 – एकदन्त – एक दांत वाले

7 – एकाक्षर – एकल अक्षर वाले

8 – गजानन – हाथी जैसे मुख वाले

9 – गजवक्र – हाथी की सूंढ़ वाले

10 – गजकर्ण – हाथी की तरह आंखे वाले

11 – गणाध्यक्ष – गणो के मालिक, गणो के नेता

12 – गौरिसुत – माता गौरी के पुत्र

13 – लम्बकर्ण – बड़े कान वाले

14 – गजवक्त्र – हाथी जैसा मुँह वाले

15 – महाबल – बलशाली, बलवान

16 – गणपति – सभी गणो के समूह के नेता

17 – लम्बोदर – बड़े पेट वाले

18 – महेश्वर – पुरे ब्रह्मांड के ईश्वर

19 – अवनीश – पुरे विश्व के प्रभु

20 – अनन्तचिदरूपम – अनंत व्यक्ति चेतना

21 – अलम्पता – अनन्त देव

22 – मंगलमूर्ति – शुभ कार्य के देवता

23 – महागणपति – देवो के देव

24 – नन्दीश्वरम – धन और निधि के देव

25 – प्रथमेश्वर – सबसे पहले पूजने वाले ईश्वर

26 – शूपकर्ण – बड़े कान वाले

27 – मूषकवाहन – चूहा जिसका सारथि है

28 – शुभम – सभी शुभ कार्यो के स्वामी

29 – सिद्धिविनायक – सफलता के स्वामी

30 – वक्रतुण्ड – वांकी सूंढ़ वाले

31 – सुरेश्वरम – देवो के देव

32 – सिद्धिदाता – इच्छाओ के स्वामी

33 – अखूराथ – सारथि जिसका मूषक hai

34 – अमित – अतुलनीय प्रभु

35 – भूपति – धरा, धरती के मालिक

36 – बुद्धिप्रिय – बुद्धि के दाता

37 – अवग्न – बाधा, विपत्ति ओ को हरने वाले

38 – भीम – विशाल, महाकाय

39 – भुवनपति – देवो के देव

40 – देवव्रत – सबका तप स्वीकारने वाले

41 – देवादेव – सभी देव में सर्वोपरि

42 – बुद्धि विधाता – बुद्धि के मालिक, दाता

43 – चतुर्भुज – चार भुजाओ वाले

44 – देवांतकनाशकारी – असुरो के विनाशक

45 – धार्मिक – दान देने वाले

46 – देवेन्द्राशिक – सभी देवता ओ के रक्षक

47 – ईशानपुत्र – शिवजी के पुत्र

48 – द्वैमातुर – दो माताओ वाले

49 – विध्नहर्ता – विग्न को दूर करने वाले

50 – विघ्नविनाशन – विग्नो का अंत करने वाला

51 – विघ्नराजेन्द्र – सभी विग्नो के भगवान

52 – दुर्जा – अपराजित देव

53 – गुणीन – जो सभी गुणों के ज्ञानी है

54 – हेरम्ब – माता का प्रिय पुत्र

55 – गदाधर – जिसका हथियार गदा है

56 – गणाध्यक्षीण – सभी गण के नेता

57 – हरिद्र – स्वर्ण रंग वाले

58 – कृपाकर – हमेशा कृपा करने वाले

59 – कीर्ति – यश के स्वामी

60 – क्षेमंकरी – क्षमा करने वाले

61 – कपिल – पिले भूरे रंग वाले

62 – कवीश – कवियों के प्रभु, स्वामी

63 – कृष्णपिंगाश – पिली भूरी आंखे वाली

64 – मृत्युंजय – मृत्यु को हरने वाले

65 – क्षिप्रा – भक्ति, आराधना के योग्य

66 – मुढाकरम – जिनमे ख़ुशी का वास होता है

67 – मनोमय – हदय जितने वाले

68 – सिद्धांथ – सफलता और उपलब्धिया के गुरु

69 – नामस्थेतु – सभी पापों पर विजय पाने वाले

70 – प्रमोद – आनंदमयि

71 – रुद्रप्रिय – भगवान शिवजी के प्यारे

72 – पीताम्बर – पिले वस्त्र धारण करने वाले

73 – रक्त – लाल रंग के शरीर वाला

74 – सर्वदेवात्मन – सभी देव के स्वीकर्ता

75 – ओमकार – ओम जैसा आकर वाला

76 – सर्वात्मन – ब्रह्मांड की रक्षा करने वाला

77 – सर्वसिध्धांत – कौशल और बुद्धि के दाता

78 – शुभगुनकानन – सभी गुण के गुरु

79 – शशिवर्णम – जो चंद्र माँ को पसंद हो, प्रिय हो

80 – श्वेता – सफ़ेद रंग रूप वाले

81 – स्कंदपूर्वज – भगवान कार्तिकेय के भ्राता

82 – सिद्धिप्रिय – इच्छा को पूर्ण करने वाले

83 – तरुण – जिसकी कोई उम्र न हो

84 – उमपुत्र – माता पार्वती के पुत्र

85 – सुमुख – शुभ मुख वाले

86 – स्वरुप – स्वरुप वान, सौंदर्य के स्वामी

87 – उदण्ड – शरारती

88 – विघ्नेश्वर – विग्नो, बाधाओं को हरने वाले

89 – योगाधिप – ध्यान के स्वामी

90 – यशस्कर – प्रसिद्धि और भाग्य के स्वामी

91 – यशस्विन – सबसे प्यारे और सबसे लोक प्रिय देव

92 – वरगणपति – वरदानो, अवसरों के स्वामी

93 – वीरगणपति – वीर गण के नेता

94 – वरदविनायक – सफलता के स्वामी

95 – विद्यावारिधि – विद्या, बुद्धि के देव

96 – विघ्नराज – सभी विग्नो के मालिक

97 – विनायक – सबका भगवान, प्रभु

98 -विकट – अत्यंत विशाल

99- विश्वराजा – संसार के स्वामी

100- विश्वमुख – पुरे ब्रह्मांड के स्वामी

101- विगनविनाशय – सभी विग्नो के नाश करने वाले

102 -यज्ञकाय – सभी पवित्र को स्वीकार करने वाले

103- नन्दन – शिवजी का नन्दन, पुत्र

104- मुक्तिदायी – आनंद और मुक्ति के दाता

105 -नाद्प्रतिष्ठित – संगीत से प्यार करने वाले

106 – योगाधिप – योग – ध्यान करने योग्य प्रभु

107 – पीताम्बराय – पीताम्बर पहनने वाले

108 – गदाधराय – गदा धारण करने वाले

 

विग्नहर्ता गणेश 

भगवान गणेश को विग्नहर्ता कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुशार कहते है की भगवान शिवजी ने उन्हें वरदान दिया था। की पृथ्वी पर किसी भी सुबह कार्य के पहले भगवान गणेश की पूजा की जाएगी। लम्बोदर को विग्नहर्ता भी कहा जाता है। इसीलिए जब भी कोई शुभ काम की शरुआत करते है तो उसे निर्विग्न पूरा करने के लिए भगवान गणेश को याद किया जाता है।

यहाँ भगवान गणेश के 108 नाम (Ganesh ji ke 108 Naam) दिया है। भक्तगण अलग – अलग नाम लेकर गणेश जी को प्रसन्न करते है। और अपनी मनोकामना पूर्ण करते है।

 

गणेश चतुर्थी का महत्व अवं महिमा 

गणपति गजानंद भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र है। भाद्रमास की शुकल पक्ष की चतुर्थी के दिन हुआ था। श्री गणेशपुराण में उसका उल्लेख है की भगवान गणेश का जन्म भाद्रमास की चतुर्थी के दिन हुआ था। भगवान गणेश के जन्म दिन के रूप में गणेश चतुर्थी को मनाया जाता है।

गणेश चाहथि के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना की जाती है। लोग अपने अपने महोल्लो में या कही लोग अपने घरमे भी गणेश जी की स्थापना करते है। गणेश जी का पूजन करते है। सुबह साम आरती की जाती है। प्रसाद बता जाता है। और 11 वे दिन भगवान गणेश की मुक्ति का विषर्जन किया जाता है।

 

विग्नहर्ता गणेशजी की आरती

शिवजी – भोलेनाथ की आरती

भगवान पशुपतिनाथ का व्रत एवं महिमा

जय आद्यशक्ति – अम्बे माता की आरती

गुजरात भरुच – नारेश्वर श्री रंग अवधूत मंदिर

 

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