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कार्तिक कृष्ण द्वादशी

भक्तिरस – BhaktiRas

भोरहि सहचरि कातर दिठि

Bhorahi Sahacari Katara Dithi – Lyrics in Hindi

कृष्ण जी अपडेट:
भोरहि सहचरि कातर दिठि

भोरहि सहचरि कातर दिठि – लिरिक्स

पाठ

भोरहि सहचरि कातर दिठि हेरि छल छल लोचन पानि ।
अनुखन राधा राधा रटइत आधा आधा बानि ।।
राधा सयँ जब पनितहि माधव, माधव सयँ जब राधा ।
दारुन प्रेम तबहि नहिं टूटत बाढ़त बिरह क बाधा ।।
दुहुँ दिसि दारु दहन जइसे दगधइ,आकुल कोट-परान ।
ऐसन बल्लभ हेरि सुधामुखि कबि विद्यापति भान ।।

स्रोत / लेखक: पारंपरिक · Claim credit

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