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कार्तिक कृष्ण द्वादशी

भक्तिरस – BhaktiRas

देकर शरण भोले अपने में समा लेना

Dekar Sharan Bhole Apne Me Sama Lena – Lyrics in Hindi

शिवजी अपडेट:
देकर शरण भोले अपने में समा लेना

देकर शरण भोले अपने में समा लेना – लिरिक्स

पाठ

बरपा है केहर भोले आकर के बचा लेना,
देकर शरण अपनी अपने में समा लेना……..

कही धरती डोले है, कही अंबर है बरसे,
तुमसे मिलने को भोले मिलने ना दे करते,
मुश्किल बड़ी राहें है, रस्ता भी दिखा देना,
बरपा है केहर भोले आकर के बचा लेना,
देकर शरण अपनी अपने में समा लेना……..

दर दर क्यों भटकु मैं, कुछ मुझमे कमी होगी,
अपनी सेवक रखलो, कदमो में जमीन होगी,
हलातों से लड़ लड़कर, जीना भी सीखा देना,
बरपा है केहर भोले आकर के बचा लेना,
देकर शरण अपनी अपने में समा लेना……..

जब भी पुकारू मैं तुमको, तुम्हे आना ही होगा,
इतनी विनती है मेरी, तुम्हे पार लगाना होगा,
जैसी हु तेरी हु, चरणों में जगह देना,
बरपा है केहर भोले आकर के बचा लेना,
देकर शरण अपनी अपने में समा लेना……..

स्रोत / लेखक: पारंपरिक · Claim credit

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