Sarasvati Mata Mantra – माँ सरस्वती वंदना मंत्र 

माता सरसवती को विद्या और कला की देवी माना जाता है। विद्यार्थी अपना ज्ञान बढ़ने के लिए माता सरस्वती की आराधना करते है। माता सरस्वती के आराधना में सरस्वती मंत्र ( Sarasvati Mata Mantra) सबसे पहले होता है।

कलाकार अपनी कला से मन्त्रमुघ्ध करने के लिए माता की शरण में जाता है। वैज्ञानिक भी ज्ञान की देवी की उपासना करते है। यहाँ माता सरस्वती की आरती है। और बहुत ही प्रचलित माता सरस्वती का मंत्र ( Sarasvati Mata Mantra) है।

माता सरस्वती का मंत्र प्रतिदिन पूजन के समय पठन किया जाता है। गीतकार, संगीतकार, कलाकार, लेखक या विधार्थी सभी माता सरस्वती की आराधना जरूर करता है।

 

माता सरस्वती की वंदना –  Sarasvati Vandna 

 

Sarasvati Mata Mantra

 

 

सरस्वती मंत्र धर्म और ज्ञान का समन्वय है। हिन्दू धर्म में आस्था रखने वाले हर कोई माता सरसवती का पूजन करता है। छोटे विद्यार्थी से लेकर वैज्ञानिक तक माता सरस्वती की उपासना करते है। स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में माता सरस्वती की उपासना की जाती है।

हमारे देश में वसंत पंचमी के दिन से सरस्वती जयंती मनाई जाती है।

 

माँ सरस्वती वंदना मंत्र 

 

या कुन्देन्दु-तुषार-हार-धवला या शुभ्र-वस्त्रावृता।
या विणा-वर-दण्ड-मण्डित-करा या श्वेत पद्मासना।।

या भ्रह्माच्युत-शंकर-प्रभुतिभीदेवैः सदा वन्दिता।
स मां पातु सरस्वती भगवती निः शेष जाड्यापहा:।।

 

भावार्थ –  जो  विद्या की देवी सरस्वती कुंड के पुष्प, च्नद्र हिमराशि और मोती के हार की तरह सफ़ेद वर्ण के वस्त्र धारण किये हुए है। जिनके कर (हाथ) में विणा शोभायमान हो रही है। सफ़ेद कमल पर जिनका स्थान है। ब्रह्मा विष्णु एवं महेश और सभी देवता जिसकी प्रतिदिन वंदना करते है, वही हमारे अज्ञान के अँधेरे को दूर करने वाली माता भगवती हमारी रक्षा करे।

 

शुक्ला ब्रह्मविचारसारपरमामाद्या जगद्यापिनी ।
विणा-पुस्तक-धारिणीम भयदां जडयान्धा कारापाहां ।।

हस्ते स्फटिका मलिका विदधति पद्मासने संस्थिताम।
वन्दे ता परमेश्वरि भगवती बुद्धिप्रदां शारदा।।

 

भावार्थ – शुक्ल वर्ण वाली, सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त महाशक्ति ब्रह्मस्वरूपिणी आदिशक्ति परब्रहम के बारेमे किया गया विचार एवं चिंतन के सार रूप में परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, सभी प्रकार के भय से छुड़ाने वाली, अज्ञान के अंधकार को मिटने वाली, हाथो में विणा, स्फटिक की माला धारण करने वाली और पद्मासन पर विराजने वाली, बुद्धि प्रदान करने वाली, सबसे ऊँचे  ऐश्वर्य से अलंकृत, माँ भगवती शारदा को में नमन करता हु, वंदन करता हु।

 

माँ सरस्वती की आरती

 

जय माँ सरस्वती माता।

चंद्रवदनि पध्मासिनी, द्युति मंगल कारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी।।
जय सरस्वती माता।।

बाए कर में विणा, दाए कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला।।
जय सरस्वती माता

देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया।
पैथी मंथरा दासी, रावण संहार किया।।
जय सरस्वती माता।।

विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो।।
जय सरस्वती माता।।

धुप दिप फल मेवा, माँ स्वीकार करो।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो।।
जय सरस्वती माता।।

माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जान गावे।
हितकारी सुखकारी ज्ञान भक्ति पावे।।
जय सरस्वती माता।।

जय सरस्वती माता, जय सरस्वती माता।
सद गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता।।
जय सरस्वती माता।।

 

माता सरस्वती की आराधना

गीतकार गीत या भजन की शरुआत करने से पहले, संगीतकार अपने वाद्य बजाने से पहले, कलाकार अपनी कला से पहले और विद्यार्थी पढाई से पहले माता सरस्वती की आराधना अवश्य करते है।

प्रतिदिन की जाने वाली पूजा में माता सरस्वती के मंत्र का उच्चारण करके माता की वंदना की जाती है।

विद्यालयों में सुबह की प्राथना में ही माता सरस्वती के मंत्र (Sarasvati Mata Mantra) का उच्चारण किया जाता है।

 

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माता सरस्वती मंत्र से लाभ 
  • विधार्थी की याद शक्ति में बढ़ावा होता है।
  • पढाई के दौरान हमारा मन एकाग्र होता है।
  • सरस्वती की आराधना से व्यक्तित्व उभरता है।
  • बोलने के क्षमता और स्पीच में आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • हमारे ज्ञान में वृद्धि होती है ।
  • कलाकार की कला में वृद्धि होती है।
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