Surya Namaskar Asan – सूर्य नमस्कार क्यों और कैसे करें ?

योगासन सदियों से वैदिक संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। हमारे ऋषिमुनियों की ये देन योग रूपी दीपक, आज दुनिया के करोडो लोगो के जीवन को प्रज्जवलित करता है। सूर्य नमस्कार योगासनों का अद्भुत समन्वय है। Surya Namaskar Asan में 12 योग आसन है। जो हमारे शरीर एवं मन को प्रफुल्लित रखता है।

 

सूर्य नमस्कार क्या है ? What is Surya Namaskar Asan

सूर्य नमस्कार, आध्यात्मिक, शारारिक एवं मानशिक स्थिति को मजबूत करने के लिए किया जाने वाले योग के आसान है।

सूर्य नमस्कार के 12 आसान हमारे मन को शांत एवं तन स्वस्थ रखने के लिए अति उत्तम योग माना जाता है।

हमारे शरीर को सुडोल, निरोगी, स्वस्थ एवं मजबूत बनाने के लिए हम अलग – अलग प्रकार के व्यायाम करते है।

सूर्य नमस्कार एक राम बाण इलाज है। सूर्य नमकस्कार करने के बाद हमें दूसरे किसी व्यायाम या योगासन करने की आवश्यकता नहीं है। इसे बाल, युवा, वृद्ध, स्त्री और पुरुष कोई भी कर सकता है।

यदि हम अपने शरीर को निरोगी रखना चाहते है। शरीर को मजबूत और तेजस्वी देखना चाहता है। मन को हम हमारे वश में करना चाहते है, तो सूर्य नमस्कार अति उत्तम उपाय है।

सूर्य नमस्कार ये भारतीय संस्कृति में आराधना पद्धति भी कहा जाता है। सनातन हिन्दू धर्म में सूर्य को भगवान माना जाता है। सूर्य नारायण के आदि – अनादि काल से अनंत उपकार इस सृष्टि पर है।

सूर्य नारायण नित्य और नियमित अपनी कृपा का स्त्रोत्र प्रकाश के रूप में इस विश्व में फैला रहे है। सूर्य देव बिना थके बिना रुके सूर्योदय और सूर्यास्त की रोजींदी क्रिया से विमुख नहीं होते।

सूर्य नारायण की इस कृपा के प्रति हम कृतज्ञता व्यक्त करते है। भगवान सूर्य नारायण का निस्वार्थ प्रेम हमें वंदन करने के लिए, नमस्कार करने के लिए प्रेरणा देता है।

सूर्य नमस्कार से हम भगवान सूर्य देवता को कृतज्ञता पूर्वक वंदन करते है। नमन करते है, प्रणाम करते है। यही सूर्य नमस्कार है।

सूर्य नमस्कार में कुल कुल बारह स्टेप्स और बारह मंत्र होते है। एक सूर्य नमस्कार में एक मंत्र का उच्चारण करके 12 स्टेप्स किये जाते है। इस बारह स्टेप्स में योगासनों की सभी मुद्रा का उपयोग होता है।

 

सूर्य नमस्कार से पहले हम सूर्य नारायण के लिए यहाँ श्लोक बोल सकते है।

भगवान सूर्य नारायण की कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए हमारे शाश्त्रो में कही श्लोक है। जिसका अंश में निचे विवरण कर रहा हु। सूर्य आराधना में हम इस श्लोक का भी इस्तेमाल कर सकते है।

आदि देव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर दर्शनम।।

अर्थ – है आदिदेव सूर्य नारायण, आपको प्रणाम करता हु। है भास्कर आप मुज पर प्रसन्न हो। है दिवाकर, है प्रभाकर में आपको प्रणाम करता हु।

आदित्यस्य नमस्कारान ये कुर्वन्ति दिने दिने।
आयुः प्रज्ञा बलं वीर्य तेजस्तेषां च जायते।।

अर्थ – जो मानव प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते है, उनका आयुष्य, रौशनी, बल, वीर्य एवं तेजस्विता बढ़ती है। साथ में हमारी त्वचा से जुड़े रोग दूर होते है।

 

Surya Namaskar Asan

 

Surya Namaskar Mantra – सूर्य नमस्कार के दौरान बोले जाने वाला मंत्र

सनातन हिन्दू संस्कृति में किसी भी मंत्र का विशेष महत्व है। मंत्र के दोनों शब्दों को अलग किया जाये तो, मन का अर्थ मनन होता है। और त्र का अर्थ शक्ति होता है। मन की शक्ति बढ़ाने के लिए किया जाने वाला जाप इसे मंत्र कहते है।

सूर्य नमस्कार सिर्फ व्यायाम नहीं है। ये एक साधना पद्धति भी है। Surya Namaskar Mantra से हम भगवान सूर्य नारायण की आराधना कर सकते है।

Surya Namaskar Asan के दौरान बोले जाने वाले मंत्र से हमारी भावना जुडी होती है। हमारा भाव और भक्ति से हमें शक्ति मिलती है।

भगवान सूर्य नारायण के अनेक उपकार इस सृष्टि पर है। और सूर्य भगवान को प्रत्यक्ष देव माना जाता है। सूर्य नमस्कार के दौरान Surya Namaskar Mantra का उच्चारण अनिवार्य है।

 

सूर्य नमस्कार के 12 मंत्र

  • ॐ मित्राय नमः
  • ॐ रवये नाम:
  • ॐ सूर्याय नमः
  • ॐ भानवे नमः
  • ॐ खगाय नमः
  • ॐ पूष्णे नमः
  • ॐ हिरण्यगर्भाय नमः
  • ॐ मरीचये नमः
  • ॐ आदित्याय नमः
  • ॐ सवित्रे नमः
  • ॐ अकाय नमः
  • ॐ भास्कराय नमः
  • ॐ सवितृ सूर्यनारायण नमः

सूर्य नमस्कार योगासनों का राजा है। योग के उत्तम 12 असानो की एक माला है। वजन कम करना हो, वजन बढ़ाना हो, निरोगी रहना हो, युवानी को टकाना हो, आयुष्य लम्बा रखना हो, तो हमें ये माला का जाप करना चाहिए।

सूर्य नमस्कार करने से पहले इन बातो का जरूर ध्यान रखे।

1 – Surya Namaskar की शरुआत करने से पहले सभी आसन एवं मंत्र का अभ्यास कर लेना चाहिए। यदि हमें Surya Namaskar Asan की सही जानकारी होगी तो हम अच्छी तरह से कर पाएंगे।

2 – सूर्य नमस्कार सूर्योदय के बाद सूर्य नारायण के सुबह के किरणों में किया जाये तो उत्तम है। सुबह के सूर्य किरण कोमल एवं ऊर्जावान होते है। ये हमारे स्वाथ्य के लिए अति लाभदायी है।

3 – Surya Namaskar Asan की शरुआत करने से पहले हल्का व्यायाम ( warm up ) कर लेना चाहिए।

4 – कोई बंध कमरे या रूम के बदले खुली हवामे सूर्य नमस्कार किया जाये तो बेहतर है। जिससे श्वासो श्वास में फ्रेस ऑक्सीज़न मिलता है।

5 – Surya Namaskra asan के दौरान अपना चहेरा सूर्य देवता की तरफ रखना चाहिए।

6 – सूर्य नमस्कार करने से पहले हमारा पेट खाली होना जरुरी है। भोजन के बाद एवं पानी का सेवन करके सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए।

6 – सूर्य नमस्कार करते समय हमारे कपडे व्यायाम में डिस्टर्ब न करे ऐसे होने चाहिए।

7 – Surya Namaskar Asan घास ( लॉन ) पर करे, या जमीन है तो आसन बिछाके करे।

8 – सूर्य नमस्कार शरीर एवं मन दोनों की कसरत है। मन को एकाग्र रखने का प्रयास करे।

9 – सूर्य नमस्कार करने के बाद थोड़ी देर आराम करे।थोड़ी देर सवासन की मुद्रा में रहे।

 

Surya Namaskar Asan – सूर्य नमस्कार के आसन

सूर्य नमस्कार योगासनों का समूह है। योग का कोई भी एक आसान विशिष्ट पद्धति से विशिष्ट लाभ के लिए किया जाता है। यहाँ प्रक्रिया एक ही है, पर आसान एक से अधिक है।

Surya Namaskar Asan यह 12 आसनों का समूह है। एक सूर्य नमस्कार में हम कुल 12 योग के आसन करते है।

सूर्य नमस्कार के आसन के दौरान दोनों पैरो का बारी – बारी से इस्तेमाल होता है।

यदि हम पहले दाहिने पैर से शरुआत करे तो इसमें 12 asan किये जाते है। पर यहाँ एक सूर्य नमस्कार पूर्ण नहीं होता। एक पैर से 12 आसन करने के बाद हम आधी मंज़िल तक पहुंचते है।

एक सूर्य नमस्कार को पूर्ण करने के लिए हमें दाहिने के बाद बायें पैर का उपयोग करके 12 आसन करना होता है।

हम दोनों पैर का उपयोग करके 12 -12 आसन करते है, तब एक Surya Namaskar Asan का एक राउंड पूर्ण होता है।

सूर्य नमस्कार के दौरान किये जाने वाले 12 असानो के नाम निचे दिये गए है। सभी असानो का अलग महत्व है। सभी असानो माँ महत्व भी जानना जरुरी है। सब का विशेष लाभ है, यह भी जानना जरुरी है।

सूर्य नमस्कार के सभी असानो को क्रम बध्ध तरीके से करना जरुरी है। इसे हम आमतौर पर किया जाने वाला व्यायाम समझने की भूल न करे। Surya Namaskar Asan हमारे ऋषि मुनियो द्वारा दी गयी अनमोल भेट है।

 

सूर्य नमस्कार के 12 आसन – Name of Surya Namaskar Asan

 

Asan Sr. No.Surya Namaskar Asan in HindiSurya Namaskar Asan Name in English
1प्रणाम आसनPrayer Pose
2हस्तउत्थान आसनRaised Arm Pose
3हस्तपाद आसानHand to Foot Pose
4अश्व संचालन आसनEquestrian Pose
5दंडासनStick Pose
6अष्टांग नमस्कारEight  Limbed Pose
7भुजंग आसनCobra Pose
8पर्वत आसनMountain Pose
9अश्व संचालन आसनEquestrian Pose
10हस्तपाद आसनHand to Foot Pose
11हस्तउत्थान आसनRaised Arm Pose
12ताड़ासनMountain Pose

 

सूर्य नमस्कार करने से पहले क्या ध्यान रखना चाहिए ?

सूर्य नमस्कार एक साधना भी है, और एक व्यायाम भी है। ये हमें मानशिक एवं शारीरिक स्वस्थता प्रदान करता है। आज देश और दुनिया में लाखो लोग सूर्य नमस्कार करते है।

सूर्य नमस्कार हम शरीर एवं मन के स्वाथ्य के लिए करते है। पर कही परिस्थितिया ऐसी है की, सूर्य नमस्कार में ध्यान न दिया जाये तो ये हमें लाभ की जगह नुकशान कर शकता है।

सूर्य नमस्कार करने से पहले कुछ विशेष बातो का ध्यान रखा जाता है। जिसकी माहिती निचे दी गयी है।

 

1 – भूखे पेट सूर्य नमस्कार करना चाहिए

सूर्य नमस्कार करने से पहले ध्यान रहे की हमें यह भूखे पेट करना है। हमें कुछ खाना खाकर या पानी पीकर सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए। इसे हमारे पांचन तंत्र पे ख़राब असर पर सकता है।  खाना खाने के बाद हमारी पांचन क्रिया स्टार्ट हो जाती है। हमारा सबसे ज्यादा एनर्जी वहां खर्च होती है। ऐसे में हमारी शारारिक कसरत शरीर के ब्लड सर्कुलेशन को असर करता है।

दूसरा खाने के बाद शारारिक श्रम करना, आसान करना, योग करना ये अनुचित है । क्युकी हमारा शरीर ही इसके लिए तैयार नहीं होता। यदि हम यह करेंगे तो, हम पूर्ण उत्साह के साथ नहीं कर पाएंगे। इसीलिए हमें surya namaskar  खली पेट करना चाहिए।

 

2- Surya Namaskar Steps के दौरान पानी नहीं पीना चाहिए

जब हम सूर्य नमस्कार करते है, तो एक तरह से पूरा शरीर श्रम करता है। हमारे शरीर का तापमान बढ़ जाता है। हमारे ब्लड का सर्कुलेशन बढ़ जाता है। एक तरह से ये हमारे शरीर में शक्ति सिंचन की प्रक्रिया है।

पिने का पानी का तपमान कम होता है। यदि सूर्य नमस्कार के बीचमे हम पानी का सेवन करते है तो, यह पानी हमारे शरीर के तापमान को डाउन करदेता है। Surya Namaskar steps  के द्वारा जिस एनर्जी संचालन की प्रक्रिया होती है, उसे यह विपरीत दिशा में ले जाता है। इसीलिए सूर्य नमस्कार के दौरान हमें पानी पिने से परहेज करना चाहिए।

 

3- Surya Namaskar asan जल्दी – जल्दी नहीं करना है।

सूर्य नमस्कार करने की एक पद्धति है। इसे हम Surya Namaskar Poses में देख सकते है। यह सभी स्टेप्स एक सिस्टम के तहत होने चाहिए। सूर्य नमस्कार के 12 आसान है। सभी असानो को पर्यात्प समय मिलना चाहिए।

कही बार बहुत ज्यादा सूर्य नमस्कार करने के चक्कर में हम सभी असानो को पर्यात्प समय नहीं दे पाते है। कही बार समय की कमी के चलते Surya Namskar Steps  जल्दी – जल्दी करने लगते है। जल्दबाजी में हम Surya Namskar Asan को हम न्याय नहीं दे पाते।

कही बार लोग झटके मारके जल्दी – जल्दी सूर्य नमस्कार करते है। सूर्य नमस्कार व्यायाम के साथ साधना है। इसे जल्द बजी में करने से न हम साधना कर पाते है और नहीं व्यायाम। जल्द बजी करने से लाभ से ज्यादा नुकशान है। इसीलिए हमें Surya Namskar Yoga पर्यात्प समय देकर करना चाहिए।

 

4- Surya Namskar Steps की संपूर्ण जानकारी होना जरुरी है।

अधूरा ज्ञान कही पे भी मुशीबत कड़ी कर सकता है। यहाँ हम सूर्य नमस्कार की बात कर रहे है, जो हमारे तन और मन को स्वस्थ रखता है।  मानशिक एवं शारारिक स्थिति को मजबूती प्रदान करता है। पर यदि इसे सही तरीके से न किया जाये तो हम अपने शरीर को नुकशान भी पंहुचा सकते है।

Surya Namaskar Steps आज सोशल मीडिया पर उपलब्ध है। सूर्य नमस्कार से जुडी संपूर्ण माहिती आपको यू टब से भी मिल सकती है। जिसमे सूर्य Namaskar के 12 steps कैसे किया जाता है, इसकी सम्पूर्ण माहिती होती है। सूर्य नमस्कार का हरेक आसान का विशेष महत्व और लाभ है।

भगवान सूर्य नारायण की साधना के नजरिये से Surya Namaskar mantra को जानना जरुरी है। और शरीर की पुष्ट के लिए 12 आसान जानना जरुरी है।

सूर्य नमस्कार के सही बेनिफिट के लिए हमें सम्पूर्ण जानकारी के साथ करना चाहिए।

सूर्य नमस्कार सिर्फ व्यायाम नहीं है, पर भगवान सूर्य नारायण के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक जरिया है। जो अपने तन और मन को स्वस्थ रखता है और भगवान में विश्वास पैदा करता है।

 

5- अनियमित सूर्य नमस्कार कर सकता है, नुकशान

किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, सिद्धि के लिए निरंतर और नित्य प्रयास जरुरी होते है। हमारी नियमितता ही हमें मंज़िल तक पंहुचा सकता है। नित्य और नियमित साधना एक तप बन जाता है।

किसी भी कार्य में अनियमितता हमें लाभ नहीं पहुँचता, बल की नुकशान कर सकता है। यदि हम नित्य सूर्य नमस्कार करने है तो, हमारा शरीर और मन एक गति से मजबूती के तरफ बढ़ते है। हमारे शरीर को आदत हो जाती है। पर यदि हम इसे नियमित नहीं करते तो कही न कही हम अपने आप को नुकशान पहुंचाते है।

व्यायाम में यदि ब्रेक लगता है तो, शरीर ढीला हो जाता है। शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी नहीं रहती। जब फिरसे स्टार्ट करते है तो, हमारे मसल्स और शरीर दर्द करने लगते है। Surya Namaskar Benifit  के लिए हमें ये नियमित करता चाहिए।

 

6- हमारी क्षमता के अनुशार सूर्य नमस्कार करे

मनुष्य का मन चंचल होता है। कही बार हम आवेश में आकर कोई भी काम हमारी क्षमता से ऊपर कर देते है। बादमे उसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। Surya Namaskar ke 12 Asan हमें शारारिक स्वस्थता प्रदान करता है।

Surya Namaskar Steps हमारे पुरे शरीर के स्नायु को असर करता है। इसलिए इसकी शरुआत कम से करनी चाहिए । और धीरे धीरे इसकी संख्या बढ़ाना चाहिए। शरुआत में हमारा शरीर दर्द कर सकता है। पर ये रोजींदी क्रिया में सामेल होने के बाद ये नित्यक्रम बन जाता है।

शरुआत में सूर्य नमस्कार के लाभ सुनकर कही लोग आवेश में आ जाते है। इसे हमारी शरीर की क्षमता के ऊपर जाके करते है। यह हमारे शरीर के लिए नुकशान कारक साबित हो सकता है। यहाँ तक की ये प्रैक्टिस हमें बीमार भी कर सकती है।

 

7- सूर्य नमस्कार के दौरान श्वासो श्वास की प्रक्रिया पर ध्यान दे ।

सूर्य नमस्कर में श्वासो श्वास की क्रिया का बहुत महत्व है। गहरी सास लेना और छोड़ना ये योग की प्रक्रिया है। इससे शरीर के अंदर की मांसपेशिया प्रभावित होती है। लम्बे श्वास के दौरान शुद्ध ऑक्सीज़न शरीर की कोशिकाओं तक पहुँचता है। और स्वास निकलते समय कार्बन डायोक्साइड बहार निकलता है।

Surya Namaskar Asan के दौरान इस प्रक्रिया से हमारा मन एकाग्र रहता है। शांति की अनुभूति करता है। इसलिए कब श्वास को अंदर लेना है, कब बहार निकलना है इसे अच्छी तरह से समज लेना चाहिए। और इसी प्रकार से Surya Namaskar Asan  श्वासो श्वास की प्रक्रिया करनी चाहिए।

 

Surya Namaskar Steps

सूर्य नमस्कार में स्टेप्स बहुत महत्वता है। एक सूर्य Surya Namaskar Asan में 12 स्टेप्स होते है। कोनसा स्टेप्स कब करना है ? और कैसे करना है ? ये जानना बहुत जरुरी है। सही पद्धति से सभी स्टेप्स किया जाये तो, Benifit of Surya Namaskar अच्छा रहता है।

निचे सूर्य नमस्कार की हरेक स्टेप्स की माहिती है। हरेक स्टेप्स को Surya Namaskar Poses के साथ बताया गया है। यहाँ से आप सभी Surya Namaskar Steps  की विस्तार से जानकारी ले सकते है।

 

1-  प्रणाम आसन 

Surya Namaskar Steps में सबसे पहला आसन प्रणाम आसन है। हम निचे Surya Namaskar Pose में पहला चित्र देख सकते है, यह प्रणाम आसन की स्थिति है। प्रणाम आसन करने के लिए सबसे पहले हमें एक साफ सुथरी जगह पसंद करके या बिछाना लगाके खड़े हो जाना है।

Surya Namaskar Asan की शरुआत के लिए मानशिक एवं शारारिक तोर पर हमें तैयार होना है। हमारे दोनों पैर एक साथ एक लाइन में जोड़कर खड़े रहना है। शरीर को ढीला रखे, मन को एकाग्र करने का प्रयास करे।

हमारे हाथ दोनों बाजु से ऊपर की तरफ उठाये और साँस अंदर लेते हुए शर के ऊपर दोनों हाथो को एकत्र करे। दोनों हाथो के पंजे को एकत्र करे। अब साँस छोड़ते हुए दोनों हाथ अपनी छाती के सामने ले आये।

यह पोजीशन नमस्कार की बनती है। इसे कहते है, Suray Namaskar Asan का पहला स्टेप्स प्रणाम आसन।

Surya Namaskar Pose -1 प्रणाम आसन 

Surya Namaskar Asan

 

2- हस्त उत्तानासन

हस्त उत्तानासन एक संस्कृत शब्द है। इसका मीनिंग हाथ को ऊपर की तरफ उठाने वाला आसन होता है। ये आसन Surya Namskar Asan में दूसरे नंबर का आसन है।

ये आसन की शरुआत प्रणाम आसान के बाद होती है। प्रणांम आसन के बाद गहरा साँस लेते हुए दोनों हाथो को ऊपर की तरफ ले जाना है।

Surya Namaskar Steps -2  हस्त उत्तानासन

Surya Namaskar Asan

हाथो को धड़ से पीछे की तरफ ले जाकर C आकर का कर्व बनाये। इसे आप ऊपर के पिक्चर में देख सकते है।

हस्त उत्तानासन हमारे हाथ पैर और शरीर के ऊपर के हिस्से को असर करता है। छाती चौड़ी होती है। पीछे के मसल्स मजबूत होते है। पेट के स्नायु का झुकाव होता है।

 

3- पाद हस्तासन ( उत्तानासन )

पाद हस्तासन को उत्तानासन भी कहा जाता है। उत्तानासन संस्कृत शब्द है उसका का मीनिंग जोर से खिचाव होता है।

सूर्य नमस्कार के तीसरे आसन में हस्त उत्तानासन से पाद हस्तासन की तरफ जाना है। साँस अंदर की तरफ खींचते हुए अपने दोनों हाथ को निचे की तरफ लाना है।

Surya Namaskar Asan -3 पाद हस्तासन

Surya Namaskar Asan

निचे की तरफ झुकते हुए हो सके तो अपने हाथ के पंजे पाव के पंजो के समांतर में ले जाये। यहाँ दर्द होने की संभावना रहती है। इसीलिए आप जहा तक कम्फर्ट समाजो वही तक जाओ।

Surya Namaskar Asan के इस स्टेप में पाव से लेकर शर तक पूरा हिस्सा प्रभवित होता है। पैर में घुटने की पीछे की नसे, पीठ का हिस्सा, गर्दन और मस्तिष्क सभी हिस्से प्रभावित होते है।

Surya Namaskar steps करने में ये स्टेप्स लोगो को सबसे कठिन लगता है। ये स्टेप्स करने में घुटन की पीछे की नसों का खिचाव होता है।

 

4- अश्व संचालन आसन

अश्व संचालन आसन का मीनिंग है, घुड़सवार आसन। इस आसन को करते समय हमारी स्थित घुडसवार की बन जाती है।

पाद हस्तासन से आगे बढ़ते हुए अपने दोनों पैर में से एक को आगे ले जाना है। हमारी जांग और पिंडी के बीचमे 90 ‘ का एंगल बनाना जरुरी है। हमारा घुटना हमारी दाढ़ी के निचे आएगा।

Surya Namaskar Image -4 अश्व संचालन आसन

Surya Namaskar Asan

 

यहाँ हमारा शर ऊपर नभ की तरफ ले जाना है। गर्दन को मोड़ना है। हमारे दोनों हाथो को पैर के समान्तर रखना है।

ये आसन हमारे हदय और फेफड़ो की क्षमता बढ़ाता है। पांचन शक्ति बढ़ती है। हमारे स्किन की चमक बढ़ती है और शरीर का लचीला पन बढ़ता है।

Surya namaskar steps के दौरान किसी भी आसन में खुद पर ज्यादा दबाव न बनाये। हमारी रोज की प्रैक्टिस से ही हमारे शरीर को सुडोल बना सकते है।

 

5 – दंडासन

सूर्य नमस्कार आसन का ये पाँचमा स्टेप्स है। अश्व संचालन की मुद्रा के बाद दंडासन की मुद्रा में जाना है।

दंडासन में दोनों पैर पीछे ले जाना है। हमारे दोनों हाथ समांतर में है, ठीक उसी तरह दोनों पैर समांतर में रखना है। हमारे शरीर को सीधा रखे।

दंड का व्यायाम आमतौर पर युवानो द्वारा ज्यादा किया जाता है। ये सूर्य नमस्कार के 12 आसन में से एक मुद्रा है। हम दंडासन की स्थिति को निचे देख सकते है।

Surya Namaskar Steps-5 दंडासन

Surya Namaskar Asan

 

6 – अष्टांग आसन

अष्टांग आसन में शरीर के आठ भाग धरती को छूटे है। इसीलिए इसे अष्टांग आसन कहते है।

दंडासन से अष्टांग आसन की और जाने के लिए। सबसे पहले अपने घुटने को धीरे धीरे धरती की और ले जाये। इसके बाद अपने मुँह और छाती को जमीन की और ले जाये।

Surya Namaskar Steps-6 अष्टांग आसन

Surya Namaskar Asan

हमारे दो पैर के पंजे, दो हाथ, दो घुटने, छाती एवं ठुड्डी को मिलाकर आठ भाग भूमि को स्पर्श करता है।

ये आसन हमारे हाथ, पैर, बाहें, हथेलिया घुटने एवं हिप्स को मजबूत करता है।

वैदिक संस्कृति में यह आसान अपने गुरु एवं आराध्य देव को प्रणाम करने के लिए भी किया जाता है।

भगवान सूर्य नारायण से हमें नियमितता और परोपकार वृति की प्रेरणा मिलती है। आदि – अनादि काल से सूर्योदय और सूर्यास्त नियमित नियत समय पे होता रहा है। और सृष्टि के सर्जन हार के रूप में निरंतर प्रकाश की वर्षा निश्वार्थ भाव से हो रही है।

 

7 – भुजंग आसान

भुजंग आसन Surya Namaskar Asan का सातवां आसन है। ये आसन खाली पेट ही करना चाहिए। 15 से 30 सेकंड तक यह आसन करने की अवधि है।

ये आसन अष्टांग आसन के बाद का आसन है। इसलिए हमें अष्टांग आसन से भुजंग आसन की तरफ मोड़ना है।

Surya Namaskar Asan-7 भुजंग आसान

Surya Namaskar Asan

हाथ को सीधा करे और शर को ऊपर की तरफ ले जाये। शरीर का पूरा वजन हथेलियों पर आएगा। छाती को ऊपर ले जाना है। पेट और जांग को जमीन के साथ रखना है। दोनों पैरो को साथ में रखना है।

इस आसन में हमारी मुद्रा कोब्रा की तरह होती है।

इस आसन से पांचन तंत्र मजबूत होता है। कमर के निचले हिस्से की स्ट्रेंथ बढ़ती है। अस्थमा एवं साइटिका जैसी बीमारी में राहत मिलती है। हदय की नशो को खोलने में मदद मिलती है। रीढ़ की हड्डी मजबूत बनती है।

 

8 – पर्वतासन

Surya Namaskar Asan में भुजंग आसान के बाद का आसान पर्वतासन है। भुजंग आसान के दौरान हमारा शर ऊपर की तरफ था, उसे निचे की तरफ लेना है। हाथ सीधा रखना है। और हमारे शरीर के बिच का हिस्सा ऊपर की तरफ ले जाना है।

इस आसान में हमारे शरीर से पर्वत का आकर निर्माण होता है। इसीलिए इसे पर्वतासन कहते है। इस आसान को हम 1 से 3 मिनिट तक कर सकते है।

Surya Namaskar Pose – 8 पर्वतासन 

suryanamaskar step8 0.jpg

पैर की एड़िया को जमीन पे रखने की कोशिश करे। इससे नसे का खिचाव होगा, पर धीरे धीरे हेबिट बन जाएगी।

पर्वतासन हमारे पेट एवं कमर के हिस्से की चरबी कम करता है। पैर मजबूत होते है, और फेफड़ो की कार्यक्षमता अच्छी रहती है।

 

9 – अश्वसंचालन आसान

अश्वसंचालन आसान हम चार नंबर पे कर चुके है। Surya Namaskar Asan में यह आसन रिपीट होता है।

यहां पर्वतासन से अश्वसंचान की तरफ प्रयाण करना है। श्वास को अंदर की तरफ खींचना है। जो पैर हम ने चार नंबर के आसान के समय इस्तेमाल किया था, वही पैर का इस्तेमाल करना है।

Surya Namaskar Image-9 अश्वसंचालन आसान

suryanamaskar step9 0.jpg

पीछे से पैर को अपनी मुँह के सामने लाना है। और घुटने को 90 का एंगल बनाना है। हाथ को सीधा रखना है। मुँह को ऊपर ले जाना है। घोड़े सवारी का पोज़ बनाना है।

 

10 – हस्तपादासन

यहां अश्वसंचालन से हस्तपादासन की तरफ जाना है। Surya Namaskar Asan में यह 10 माँ आसान है। दोनों पैर को समांतर में रखना है। अपने आप को निचे की तरफ मोड़ना है।
दोनों पैर को सीधा रखना है। सर को दोनों पैर के बीचमे घुटने तक ले जाना है।

Surya Namaskar Asan – 10 हस्तपादासन

suryanamaskar step3 0.jpg

सूर्य नमस्कार में 03 नंबर और 10 नंबर का यह आसान अत्यंत लाभदायी है। पृष्ठ भाग की मासपेशियो की खिचाव होता है। रीड की हड्डी मजबूत होती है। Surya Namaskar Pose में में यह आसान देख सकते है।

 

11- हस्तउत्थान आसन

Surya Namaskar Steps में 12 आसान होता है। हस्त उत्थान आसन 2 और 11 का आसन है। यहाँ हमें हस्तपादासन से हस्तउत्थान आसन की तरफ बढ़ना है।

हमें सीधे खड़े होकर श्वास को अंदर लेते हुए हाथ को ऊपर की तरफ ले जाना है। अपने शरीर को कमर से पीछे की तरफ मोड़ना है।

Surya Namaskar Steps – 11 हस्तउत्थान आसन

suryanamaskar step2 0.jpg

नियमित करने से इस आसन के अनेक लाभ है। रीड की हड्डी, पैर की मांसपेसिया, पेट की चरबी दूर होती है। इस Surya Namaskar Image को हम ऊपर के पोज़ में देख सकते है।

 

12 – तड़ासन

Surya Namaskar Asan का ये आखरी स्टेप्स है। यहाँ एक सूर्य नमस्कार के 12 आसन पूर्ण होता है। पर सूर्य नमस्कार पूर्ण नहीं होता। ये 12 आसन सूर्य नमस्कार के आधे रास्ते पहुंचाता है।

Surya Namaskar Asan- 12 तड़ासन

Surya Namaskar Asan

हस्त उत्तानासन से ताड़ासन में जाने की प्रक्रिया आसान है। पीछे की तरफ से थोड़ा आगे स्ट्रैट रहना है। हमारे दोनों पैर समान्तर रहना चाहिए और इसके बिचनमे थोड़ी गैप रेहनी चाहिए। दोनों हाथ ऊपर से जोड़ देना है।

ताड़ासन हाथ की नसे, पैर, रीड की हड्डी को मजबूत करता है। हम ऊपर के पिक्चर में ताड़ासन की आकृति देख सकते है। ताड़ासन के बाद हम सूर्य नमस्कार के बिच में पहुंच जाते है। 

एक सूर्य नमस्कार पूर्ण करने के लिए कुल मिलाकर 24 आसन किया जाता है।
ताड़ासन का image हम देख सकते है।

यह आसान से शारारिक एवं मानशिक संतुलन विकशित होता है।

 

सूर्य नमस्कार के लाभ- Benefits Of Surya Namaskar

सूर्य नमस्कार एक नित्य नियमित किया जाने वाला व्यायाम और उपसना है। ये हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रदान करता है। सूर्य नमस्कार से दौरान श्वासो की क्रिया हमारे शरीर को बेहतर बनाती है।

सूर्य नमस्कार के 12 आसान से हमारी पेट की मांस पेसिया मजबूत होती है। इसे नित्य और निरंतर किया जाये तो पेट का मोटापा दूर होता है। चरबी कम होती है।

सूर्य नमस्कार के 12 स्टेप्स में पुरे शरीर का व्यायाम हो जाता है। इससे पूरा शरीर लचीला एवं कोमल बनता है।

सूर्य नमस्कार के व्यायाम से बुढ़ापा जल्दी नहीं आता। रोजिंदा जीवन में सूर्य नमस्कार हमें लम्बे समय तक युवान रखता है। हमारा शरीर स्फुर्तीला रहता है।

बढ़ा हुआ वजन कम करने में सूर्य नमस्कार राम बाण इलाज है। नियमित रूप से सूर्य नमस्कार किया जाये तो हम आसानी से वजन कम कर सकते है।

स्त्रियों के लिए के लिए सूर्य नमस्कार विशेष लाभदायी होता है। मासिक धर्म में अनियमितता या दर्द सूर्य नमस्कार से दूर होता है। निरंतर करने से संतान को जन्म देते समय का दर्द कम होता है।

सूर्य नमस्कार से हमारे फेफड़े मजबूत होते है। सूर्य नमस्कार के दौरान स्वसन क्रिया की एक पद्धति है। इस पद्धति से श्वास लेना छोड़ना ये सूर्य नमस्कार का हिस्सा है। इससे स्वच्छ ऑक्सीज़न मिलता है और कार्बन डाईऑक्साइड बहार निकलता है।

पेट से जुडी समस्या जैसे अपच, कब्ज दूर होती है। सूर्य नमस्कार से पांचन तंत्र मजबूत बनता है।

शांत चित एवं एकाग्रता से सूर्य नमस्कार हमारी स्मरण शक्ति को बढ़ाता है। हमारे तन और मन को प्रफुलित रखता है।

सूर्य नमस्कार रूपी योग हमारे हदय, त्वचा, लीवर, गला एवं पीठ की हड्डी सभी को असर करता है। और इसे स्वस्थ एवं मजबूत रखता है।

सूर्य नमस्कार किसे नहीं करना चाहिए

सूर्य नमस्कार 12 असानो की योग पद्धति है। इससे शारारिक एवं मानसिक दोनों तरह के व्यायाम होते है। इसे हमारे शरीर एवं हमारी मौजूदा परिस्थिति को ध्यान में रखकर किया जाता है।

सूर्य नमस्कार किस हालात में नहीं करना चाहिए, किसे परहेज करना चाहिए इसकी विस्तृत जानकारी निचे दी गयी है।

1 – सूर्य नमस्कार एक शारारिक व्यायम है। इसे करने के लिए हमारा शरीर स्वस्थ होना चाहिए। हम बीमार है या हमारी तबियत ठीक नहीं है तो, वैसी स्थिति में हमें सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए।

2 – प्रेगनेंसी के तीन महीने के बाद सूर्य नमस्कार के योग करना ठीक नहीं है। क्युकी सूर्य नमस्कार में पेट से जुडी कसरत की जाती है। जो पेट में पल रहे बालक के लिए ठीक नहीं है।

3 – ब्लड प्रेसर से जुडी समस्या है तो सूर्य नमस्कार करने से पहले डॉक्टर की राय लेना जरुरी है। शारारिक कसरत हमारे BP को बढ़ाता है। इसीलिए इससे जुडी समस्या है तो सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए।

4 – हमारी हाथ की कलाई में या हाथ में कोई प्रॉब्लम है तो, ऐसे वक्त सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए। क्युकी हमारे सम्पूर्ण शरीर का वजन हमारे हाथ पर रहता है, ऐसे में हमारी समस्या बढ़ सकती है।

5 – मासिक धर्म के दौरान सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए क्युकी यह एक उपासना भी है और ऐसी स्थिति में स्त्रियों को आराम करने की सलाह दी जाती है।

6 – हमारे शरीर में किसी तरह की इंजरी या पीठदर्द है तो, डॉक्टर की सलाह के बिना सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए।

7 – हदय सम्बन्धी कोई बीमारी है तो, सूर्य नमस्कार करने से पहले डॉक्टर या फिर योग शिक्षक की सलाह जरूर ले क्युकी, हदय की गंभीर बीमारिया शारारिक कसरत में परेशानी पैदा करती है।

सूर्य नमस्कार खली पेट किया जाता है। हम रोज जिन ( व्यायाम शाला ) में जाते हुए बहुत लोगो को देखते है। व्यायाम के मेहगे सामान मंगवाते है। पैसे देकर व्यायाम करते है। इन सबमे सबसे उत्तम सूर्य नमस्कार है।

 

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